फिटमेंट फैक्टर कैसे काम करता है?
फिटमेंट फैक्टर वेतन संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा है क्योंकि यही तय करता है कि आपका नया मूल वेतन कितना होगा। बाकी सब — DA, HRA, परिवहन भत्ता, पेंशन और ग्रेच्युटी — इसी नए मूल वेतन से निकलते हैं। यह समझना जरूरी है कि गुणक में मौजूदा DA का विलय पहले से शामिल होता है, इसलिए बड़ा दिखने वाला गुणक भी जेब में उतनी बड़ी वृद्धि नहीं देता।
गुणक की संरचना
फिटमेंट गुणक = (1 + DA अनुपात) × (1 + वास्तविक वृद्धि)। 2016 में DA 125% था, इसलिए 2.25 × 1.1429 ≈ 2.57 बना। 2026 में DA 60% रहने पर 1.60 × 1.1429 ≈ 1.83 बनेगा, जबकि 1.60 × 1.425 ≈ 2.28 बनता है।
6वें और 7वें आयोग की तुलना
6वें वेतन आयोग में पे बैंड और ग्रेड पे व्यवस्था के साथ प्रभावी गुणक 1.86 रहा। 7वें वेतन आयोग ने उसे हटाकर 19 स्तरों वाला पे मैट्रिक्स दिया और 2.57 का समान गुणक लागू किया, जिससे न्यूनतम वेतन ₹7,000 से ₹18,000 हुआ।
मैट्रिक्स सेल पर पूर्णांकन
गुणा का परिणाम सीधे वेतन नहीं बनता। उसे आपके स्तर के मैट्रिक्स में बराबर या उससे ऊपर वाले पहले सेल पर तय किया जाता है, इसलिए वास्तविक आंकड़ा गणना से कुछ अधिक हो सकता है।
पेंशन पर भी वही गुणक
पिछले दोनों आयोगों में मौजूदा पेंशनभोगियों की मूल पेंशन पर भी वही गुणक लगाया गया था। इसलिए फिटमेंट फैक्टर का असर 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों पर भी पड़ता है।